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WhatsApp के मेसेज को अब आप कर पाएंगे एडिट

मैसेजेस एडिट करने के बारे में जानकारी Android आप किसी मैसेज को भेजने के 15 मिनट बाद तक उसे एडिट कर सकते हैं. यह मैसेज चैट में शामिल सभी यूज़र्स के लिए अपडेट हो जाएगा. एडिट किए गए मैसेज पर टाइम स्टैंप के बगल में “एडिट किया गया” लिखा हुआ दिखेगा. अगर आप WhatsApp का नया वर्शन इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो आपको “यह मैसेज इस चैट में शामिल उन सभी यूज़र्स के लिए एडिट किया गया है जो WhatsApp का नया वर्शन इस्तेमाल कर रहे हैं.” मैसेज दिखेगा. एडिट किए गए मैसेजेस देखने के लिए अपना ऐप अपडेट करें . किसी मैसेज को ऐसे एडिट करें 1 आप जिस मैसेज को एडिट करना चाहते हैं उस पर टैप करके दबाए रखें और फिर अन्य ऑप्शन पर टैप करें. 2 एडिट करें को चुनें और अपना मैसेज अपडेट करें. 3 एडिटिंग करने के बाद मैसेज अपडेट करने के लिए चेकमार्क पर टैप करें. ध्यान दें: आप किसी मैसेज को भेजने के 15 मिनट बाद तक उसे एडिट कर सकते हैं. अगर आप किसी मैसेज को एडिट करते हैं, तो आपकी चैट में शामिल लोगों को नई चैट का नोटिफ़िकेशन नहीं मिलेगा. आप फ़ोटो, वीडियो या कोई अन्य मीडिया एडिट नहीं कर सकते.

मिलिट्री कॉलेज ने किया आरओवी और माइन डिटेक्टर का निर्माण

 मिलिट्री कॉलेज ने किया आरओवी और माइन डिटेक्टर का निर्माण



बॉर्डर एरिया और संवेदनशील इलाकों में भारतीय सेना को अक्सर लैंड माइंस ढूंढने में मशक्कत का सामना करना पड़ता है। भारतीय सेना के लिए दुश्मनों की बिछाई सुरंगों से जाना या उन्हें ढूंढना एक जोखिम भरा काम है। इसके लिए आत्मनिर्भर भारत पहल को आगे बढ़ाते हुए मिलिट्री कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने ऑपेरशन के दौरान दुश्मनों की स्थिति का पता लगाने के लिए एक वाहन का निर्माण किया है। यह दूर से संचालित होगा। यह एक आरओवी और माइन डिटेक्टर उपकरण है, जिसको कैप्टन राज प्रसाद ने बनाया है। 

लैंड माइंस को खोजने में करेगा सैनिकों की मदद

इस उपकरण के माध्यम से मिलिट्री ऑपेरशन के दौरान दुश्मनों का पता लगाया जा सकेगा। उनकी वास्तविक स्थिति के साथ जरूरत पड़ने पर यह खुद ही विस्फोट कर दुश्मन को मार गिरा सकता है। यह उन सुरंगों की पहचान करेगा जहां खतरा है या जहां विस्फोटक सामग्री बिछाई गई है। इससे हमारे सैनिक आने वाले खतरे के लिए पहले से ही तैयार हो जाएंगे। रिमोट ऑपरेटिड व्हीकल (आरओवी) में मेटल डिटेक्टर की सुविधा भी दी गई है। जो लैंड माइन्स को खोजने में सैनिकों की मदद करेगा। 

जीपीआर से लगाएगा दुश्मनों का पता

इसका निर्माण करने वाले कैप्टन राजप्रसाद कहते हैं कि इसमें मेटल डिटेक्टर का उपयोग किया गया है। जिसमें ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) लगाया गया है। इसके साथ ही इसमें एक ल्युमिनेटिंग स्प्रे की सुविधा भी दी गई है। इसका कार्य ये होगा कि यह उन जगहों पर निशान लगाएगा जहां खतरा है या उन जगहों को चिन्हित करेगा जहां खतरा होने की संभावना है। इसके माध्यम से सैनिकों को दुश्मनों द्वारा बिछाए गए खतरों के बारे में जानने में मदद मिलेगी और वह इस निष्क्रिय कर पाएंगे। इस निशान को दिन और रात दोनों वक्त देखा जा सकेगा। इस आरओवी में 2 कैमरे 360 डिग्री वाले भी लगाए गए हैं। 

जरूरत पड़ने पर करेगा खुद विस्फोट

कैप्टन राजप्रसाद आगे बताते हैं कि इसमें ट्रूप वायर को काटने की भी क्षमता है। यह उन जगहों में जा सकेगा जहां भारतीय सैनिकों के लिये जौखिम भरा है। यह इन्फेंट्री सैनिकों या जो सैनिक फील्ड पर मौजूद हैं उनके लिए काफी उपयोगी साबित होगा क्योंकि ये ट्रूप से आगे जाकर माइन को डिटेक्ट कर सकता है। इसमें विस्फोट करने की क्षमता भी है। जरूरत पड़ने में यह खुद दुश्मनों की जगहों का पता लगाएगा और खुद विस्फोट कर देगा। 

 

अभी तक यह आरओवी और माइन डिटेक्टर वाहन ट्रायल मोड में है। एक बार जब यह पूरी तरह से सफल पाए जाएंगे उसके बाद इन्हें सेना को उपयोग के लिए दे दिया जाएगा।