तेजस लाएगा भारतीय रक्षा उद्योग में बड़ा बदलाव
स्वदेश निर्मित तेजस लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनने जा रहा है। सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति ने वायुसेना के लिए घरेलू रक्षा खरीद के तहत करीब 48 हजार करोड़ रुपए की लागत से 83 तेजस विमान खरीदने की मंजूरी दे दी। इसमें 73 एलसीए तेजस हैं जो एमके 1ए लड़ाकू विमान है, जबकि 10 एलसीए तेजस एमके 1 ट्रेनर विमान हैं। इसके साथ ही, डिजाइन और बुनियादी ढांचे के लिए विकास के लिए 1202 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल से 83 तेजस विमान खरीदने की मंजूरी से भारतीय वायुसेना की शक्ति में और इजाफा होगा, साथ ही आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। क्या कहना है इस डील पर रक्षा विशेषज्ञों का इसबारे में विशेष चर्चा की।
तेजस खुद में एक सक्षम लड़ाकू विमान
इस बारे में रिटायर्ड एयर मार्शल निर्दोष त्यागी कहते हैं कि इससे सबसे पहले तो भारत की आत्मनिर्भरता तो बढ़ेगी ही वहीं भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन की जो कमी है वो भी पूरी हो जाएगी। निर्दोष त्यागी का कहना है कि तेजस खुद में एक सक्षम विमान है। खास बात यह है कि इसमें जो भी उपकरण लगे हैं वह स्वदेशी हैं और इसमें एचएएल के अलावा कई अन्य प्राइवेट कंपनियां भी जुड़ी हैं। इससे अन्य कई कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
भारतीय उद्योग में आएगा बदलाव
आत्मनिर्भर भारत को कैसे बढ़ावा मिलेगा इस बारे में एचएएल के पूर्व सीएमडी टी. सुवर्ना राजू कहते हैं कि भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक तरह से कृषि की फसल है तेजस, जो वर्षों से इस पर काम कर रहे थे। सबसे अहम बात ये है कि यह पूरी तरह से हमारा उत्पाद है, इसको खुद डिजाइन किया और बनाया है। इसका हार्ट यानी डिजिटल फ्लाइंग कंट्रोल सिस्टम भी हमारे ही वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने बनाया है। इसका कोड हमारे पास, इसमें कभी कोई भी जरूरत के अनुसार बदलाव कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इसलिए आने वाले समय में मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में बहुत बदलाव आएगा। पहले एचएएल ही पूरा काम करती थी। लेकिन तेजस बनाने के लिए काम बढ़ा और कई अन्य कंपनियों को जोड़ा गया। एचएएल द्वारा हल्के लड़ाकू विमान के निर्माण से आत्मनिर्भर भारत पहल को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। देश में रक्षा उत्पादन और रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। इस खरीद में एचएएल के साथ डिजाइन और विनिर्माण क्षेत्रों में एमएसएमई सहित लगभग 500 भारतीय कंपनियां काम करेंगी। इससे रोजगार का बहुत बड़ा अवसर मिलेगा।
दूसरे देशों में भी होंगे निर्यात
तेजस में कई नई तकनीकियों का प्रयोग किया गया है। ऐसे में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तेजस के आने से भारत का वैश्विक रक्षा बाजार में कैसा रुतबा होगा, इस पर डीआरडीओ के वैज्ञानिक रवि कुमार गुप्ता कहते हैं कि एक समय तेजस को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। लेकिन, केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद एक बार फिर इस प्रोग्राम को दोबारा लाया गया और आज ये रक्षा क्षेत्र में बड़ी ताकत बन कर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि मार्क 1 की तुलना में मार्क 1ए और अधिक शक्तिशाली है।
वहीं रवि कुमार कहते हैं कि जब हम आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं तो किसी भी रक्षा हथियार का लाइसेंस होता है। हर कोई उसे नहीं बना सकता है, क्योंकि कोई भी देश अपनी तकनीक दूसरे देश को जल्दी नहीं देता है। ऐसे में तेजस के आने के बाद भारतीय रक्षा उद्योग में एक बूम आने वाला है। भारत में अब तेजस बनेंगे तो कहीं न कहीं दूसरे देश में भी निर्यात होंगे।
तेजस की खासियत
> तेजस चौथी पीढ़ी का अत्याधुनिक उपकरणों से लैस लड़ाकू विमान है
> तेजस का वजन 12 टन है
> लंबाई 13.2 मीटर है
> पंख फैलाव 8.2 मीटर है
> तेजस की ऊंचाई 4.4 मीटर है
> तेजस लड़ाकू विमान की रफ्तार 1350 किमी प्रति घंटा है
> स्वदेश में विकसित और निर्मित अत्याधुनिक हल्के लड़ाकू विमान है
> भारत की अत्याधुनिक परिचालन क्षमताओं से लैस है तेजस
> तेजस में इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए गए सक्रिय एरे ( एईएसए) रडार है
> दृश्यता के दायरे से बाहर (बीवीआर) मिसाइल से लैस किया जा सकता है
> इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक से इसमें हवा में ईंधन भरा जा सकता है
> तेजस लड़ाकू विमान मिग-21 की जगह लेगा
> तेजस हवा से हवा और हवा से जमीन पर वार करने में सक्षम हैं
> तेजस विमानवाहक पोत से टेकऑफ और उस पर लैंडिंग करने में सक्षम हैं
> तेजस में एंटीशिप मिसाइल, बम और रॉकेट भी लगाए जा सकते हैं, जिसका हाल ही में परीक्षण भी किया गया है
> कार्बन फाइबर के कारण हल्का और धातु के मुकाबले बेहद मजबूत लड़ाकू विमान है तेजस
> तेजस में स्वदेश निर्मित मुख्य सेंसर ‘तरंग रडार’ भी है जो कि दुश्मन मिसाइल की जानकारी देता है